दुहरी होने लगी कमर |
कन्धों पर भारी है सर |
राम-राम आदाब बंद हैं
धर्मों में बँट गया शहर |
शाम हुई घर जाना है
पर कैसा औ’ किसका घर |
क्यूँ हर रात सताता है
रोज़ सुबह होने का डर |
मौसम क्या रुक पायेगा
जब तक होगी उन्हें ख़बर |
मंज़िल का कुछ पता नहीं
सारा जीवन सिर्फ़ सफर |
विष पीकर जीती दुनिया
अमृत पीकर जाती मर |
दिल की राहें रोक खड़े
पत्थर के मस्जिद-मंदर |
१९-मई-१९९५
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