ख़त लिख दे सांवरिया के नाम बाबू |
वो कहते थे कर देंगे काम बाबू |
कोई भी शासन हो ‘लाला’ फलेंगे
इनका पक्का है सब इंतज़ाम बाबू |
जो राजा थे, राजा हैं, राजा रहेंगे
और अपने को रहना अवाम बाबू |
हमको तो नियमों में बंधोगे लेकिन
कौन नेता को डाले लगाम बाबू |
वे महलों में रहकर भी मौसम से डरते
नींद अपनी क्यों जाने हराम बाबू |
कहते हैं ‘जनता’ अब दिल्ली में रहती
मुझे तू ही बता मेरा नम बाबू |
८-दिसम्बर-१९७५
बतर्ज़ – ख़त लिख दे सांवरिया के नाम बाबू – फ़िल्म आए दिन बहार के, आशा भोंसले